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कोरोना की जंग मे असली योद्धा सफाई कर्मचारी


कोरोना की जंग मे असली योद्धा सफाई कर्मचारी

फिर भी कोई मानसम्मान के नजरो नही देखता

राजेश रेवते, संघटन मंत्री, भारतीय सुदर्शन समाज महासंघ, महाराष्ट्र प्रदेश ने जनाधिकार मीडिया के चीफ व्यूरो पत्र परिषद में व्यक्त किया अपने समाज के प्रति अपना दर्द

चंद्रपूर (महाराष्ट्र):- दिनांक 21मई 2021

बदकिस्मत सफाई कर्मी कोरोना के खिलाफ लड़ी जा रही जंग में बगैर सुविधाओं के साथ इस युद्ध मे सफाई कर्मी ऐसे सैनिक हैं जो इस महामारी मे अपनी और अपने परिवार की जान जोखीम मे डालकर इस युद्ध मे लढाई लड रहे है। यदि इन्हे भी आधुनिक अस्त्र – शस्त्रों याने मास्क , स्पेशल पीपीई किट, सॅनिटायझर झाडू जैसे वस्तू मिले तो ये जी जान लगाकर लडते , फिर भी अपनी सुरक्षा का सामान स्वयंम खरीदकर सेवा दे रहे है। इस महामारी के युद्ध सफाई कर्मचारी को सुरक्षित किट मिले तो कोरोना के खिलाफ डटकर खड़े रहेंगे और लढाई मे जीत भी हासील करेंगे और देश को भी सुरक्षित रखेंगे।
आज भी सफाई कर्मचारी अपनी जान जोखीम मे डालकर शहर और ग्रामिण क्षेत्र मे गली गली साफ सफाई कर रहा है, नाली साफ कर रहा, गंदगी अपने हाथो से उठा रहा है इतना ही नहीं तो इस कोरोना महामारी मे कोरोना मरीज का सबसे पहले सामना सफाई कर्मी से होता है बाद मे वार्ड बॉय नर्स आते है और तद पश्चात डॉक्टर यह अपनी सुरक्षा किट पहन कर आते है परंतु सफाई कर्मचारी बगैर किट से काम करते देखा जाता है। कोरोना पेशंट का मृत्यू होने पर जब उनका सगा परिवार का सदस्य अथवा रिस्तेदार भी पास नही भटकता उस वक्त मृतक की लाश को पेकिंग से लेकरं तो शव वाहन मे डालने और इस कोरोना महामारी मे अस्पताल से लेकरं तो मुर्दा घर और मुर्दा घर से लेकरं तो स्मशान मे कोरोना बाधित मृत्यू व्यक्ती का अंतिम संस्कार करने तक सभी काम सफाई कर्मचारी करता है परंतु फिर भी सफाई कर्मचारी को कभी भी सम्मान के नजरिये नही देखा जाता है ।

स्पेशलिस्ट डॉक्टर नर्सिंगकर्मी और हर प्रकार के डॉक्टर को कोरोना से सुरक्षित रखने के लिए पीपीईटी किट , मास्क , दस्ताने आदि सुरक्षा उपकरणों के साथ रहते है ।लेकिन सफाई कर्मी जी – जान से बगैर सुरक्षा किट से जुटे रहते हैं ।
सफाई कर्मचारी सडक साफ करने से लेकरं तो गलिया, नालीया,गटर साफ करते है इतना ही नही इन दिनो सफाई कर्मचारी से आठ घंटे काम करवाने के बजाये उनसे चोविसो घंटे काम कारवा रहे है इतना ही नही तो कुछ अधिकारी कर्मचारी सफाई कर्मचारी को धमकाकर अतिरिक्त काम करवा रहे है। इसी तरह के अतिरिक्त काम करवा ने के कारण दिनांक 21अप्रैल 2021को महाराष्ट्र चंद्रपूर के जिला सामान्य चिकित्सालय का सफाई कर्मी राहुल सुधाकर नंहेट और उसकी माता दोनो ही कोरोना बाधित होकर अपनी जान गवाए गये।
बडी विडंबना है की सफाई कर्मचारी को कभी भी सम्मान जनक स्थान नही दिया गया आज देश को जरूरत है की सफाई कर्मचारी और उनके परिवार का स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास व्यवस्था, पोषण व्यवस्था पर कोई भी ध्यान नही देता जहा लॉक डाऊन मे सभी दफ्तरो मे 10-20 प्रतिशद ही कर्मचारी काम कर रहे है परंतु सफाई कर्मचारी सौ फिसदी काम कर रहा है इतना ही नही तो इन सफाई कर्मचारी को अतिरिक्त डबल-टिबल काम कारवा रहे है।
सफाई कर्मचारी की सराहना कर उनका मनोबल बनाये रखना चाहीये उनके साथ संवेदनशील व्यवहार होना चाहीये साथ ही अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध करना चाहीये सफाई कर्मचारी के परिवार के लिये सार्थक योजना बनाकर उसका लाभ देने की आवश्यकता है। ऐसा करने से सफाई कर्मचारी और उनके परिवार का कोरोना महामारी मे काम करते वक्त हौसला बुलंद हॊगा। सफाई कर्मचारी का काम इस कोरोना काल मे जिस तरह देश सेवा मे हमारे सैनिक काम कर रहे है वैसे ही इस देश मे स्वच्छता काम करने वाले सफाई कर्मचारी भी देश सेवा ही कर रहे है।
राजेश रेवते, संघटन मंत्री, भारतीय सुदर्शन समाज महासंघ, महाराष्ट्र प्रदेश ने जनाधिकार मीडिया के चीफ व्यूरो पत्र परिषद में व्यक्त किया अपने समाज के प्रति अपना दर्द

@ किशोरीकांत चौधरी
ब्यूरो चीफ महाराष्ट्र

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