जन प्रतिनिधि मौन,आखिर सड़क बनवायेगा कौन

हर बोर्डों पर विकास की तस्वीर, सड़कों पर ‘चुनार की झील’!
जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

जौनपुर मछलीशहर विधान सभा क्षेत्र के ग्राम बधवां बाजार-बरावाँ में मुख्यमार्ग बदहाल
रोजाना छात्र-छात्राओं और करीब दो हजार से ज्यादा लोगों का आवागमन प्रभावित,आये दिन लोग हो रहे हैं चोटिल
विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का फर्क देखना हो तो मछलीशहर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बरावां की इन सड़कों पर एक बार जरूर गुजरिए।
बधवां बाजार से भटहर मीरगंज रोड से लिंक कन्या पाठशाला, अंसारी बस्ती, कायस्थ बस्ती, दर्जीयाना बस्ती से होते हुये जगदीशपुर गांव को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग बारिश के दिनों में सड़क कम और पानी से भरी झील ज्यादा नजर आता है। जगह-जगह गड्ढायुक्त जलभराव और खराब सड़क के कारण स्कूली बच्चों, राहगीरों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
यह मार्ग सिर्फ दो गांवों को नहीं जोड़ता, बल्कि आसपास के करीब पाँच गांवों के लोगों के दैनिक आवागमन का प्रमुख रास्ता है इसी मार्ग पर कन्या पाठशाला, कंचन बालिका, रामगढ़ इंटर कालेज,प्रसिद्ध शिव शक्ति मन्दिर,दुर्गा मन्दिर और चौरा माता का मन्दिर भी स्थित है,जहां प्रतिदिन श्रद्धालुओं, छात्र- छात्राओं और ग्रामीणों का आना जाना होता है.ऐसे में सड़क की बदहाली का सीधा असर विद्यार्थियों और ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है।
क्षेत्र में जगह-जगह जनप्रतिनिधियों और विकास कार्यों से जुड़े बड़े-बड़े बोर्ड जरूर दिखाई देते हैं। बोर्डों पर यह बताने की होड़ नजर आती है कि कौन-सा कार्य किसके प्रयास से हुआ। लेकिन सवाल यह है कि *जिन रास्तों से होकर जनता रोज गुजर रही है, उनकी बदहाली पर ध्यान कौन देगा?*
जनता का सवाल सीधा है
👉क्या विकास का मतलब सिर्फ नए कार्यों के शिलान्यास और बोर्ड लगाने तक सीमित रह गया है
👉क्या इन जर्जर सड़कों की मरम्मत के लिए जनप्रतिनिधि संबंधित विभागों के सामने प्रभावी तरीके से आवाज नहीं उठा सकते?
स्थानीय लोगों के मुताबिक इस मार्ग की हालत लंबे समय से खराब है। बारिश में स्थिति और मुश्किल हो जाती है और राहगीरों को सड़क पर कदम-कदम पर संभलकर चलना पड़ता है।
जनता अपने जनप्रतिनिधियों को पांच साल के लिए चुनती है, ताकि क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं का समाधान हो सके। सड़क, नाली, जलनिकासी और आवागमन जैसी समस्याएं किसी राजनीतिक दल की नहीं बल्कि सीधे जनता की जरूरत हैं।
ग्राम प्रधान,सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों के पास अपने-अपने स्तर पर संबंधित विभागों और जिला प्रशासन के समक्ष समस्याएं उठाने तथा विकास कार्यों के लिए पहल करने की व्यवस्था है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि जर्जर मार्गों की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कराकर स्थायी समाधान कराया जाए।
जनता का आईना जनप्रतिनिधियों के सामने
बारिश के पानी में डूबी सड़क आज सिर्फ एक रास्ते की तस्वीर नहीं दिखा रही, बल्कि विकास के हर दावों का आईना भी दिखा रही है। जिन गांव के लोग हर चुनाव में मतदान कर अपने प्रतिनिधि चुनते हैं, वही लोग आज पूछ रहे हैं—
“हमने वोट विकास के लिए दिया था, सिर्फ बोर्ड देखने के लिए नहीं।”
अब देखना यह है, कि क्षेत्र के वर्तमान जनप्रतिनिधि इस बदहाल सड़क की सुध लेते हैं, या फिर अगली बारिश तक जनता इसी ‘झील’ से होकर गुजरने को मजबूर रहती है।
धर्मेन्द्र प्रताप श्रीवास्तव
जिला संवाददाता जौनपुर
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