अमर सेनानी राना बेनी माधव सिंह की गौरवगाथा राष्ट्र के स्वाभिमान और वीरता की अमर धरोहर : हरिचंद्र बहादुर सिंह
अमर सेनानी राना बेनी माधव सिंह की 222वीं जयंती को भव्य बनाने की तैयारी तेज
राना की जन्मस्थली शंकरपुर
में जयंती पर जुटेंगी की दिग्गज हस्तियां
सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक आयोजनों के जरिए युवाओं में जगाई जाएगी राष्ट्रभक्ति
अवध केसरी, रणबांकुरे और अमर सेनानी जैसी उपाधियों से अलंकृत 1857 की क्रांति के महानायक राना बेनी माधव सिंह की वीरगाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए शंकरपुर में तैयारियां तेज
शंकरपुर/जगतपुर, रायबरेली। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी, वीर शिरोमणि एवं अवध केसरी राना बेनी माधव सिंह की 222वीं जयंती को ऐतिहासिक और भव्य स्वरूप देने की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में राना बेनी माधव सिंह स्मारक समिति, शंकरपुर, (जगतपुर) की मासिक बैठक राना बेनी माधव सिंह इंटर कॉलेज, शंकरपुर में आयोजित हुई, जिसमें आगामी 24 अगस्त को आयोजित होने वाले जयंती समारोह की विस्तृत रूपरेखा तय की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि राना बेनी माधव सिंह की जन्मस्थली एवं कर्मस्थली शंकरपुर में आयोजित होने वाला समारोह केवल जयंती कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा। राना की 222वीं जयंती को राष्ट्रभक्ति, सामाजिक जागरूकता और युवा प्रेरणा का विराट आयोजन बनाया जाएगा। इसके अंतर्गत सामाजिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी, जिससे युवा पीढ़ी को राना की शौर्यगाथाओं, त्याग और मातृभूमि के प्रति समर्पण से प्रेरणा मिल सके। समिति संस्थापक हरिचंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि राना बेनी माधव सिंह केवल एक योद्धा नहीं थे, बल्कि अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध अवध की अस्मिता और स्वाभिमान के प्रतीक थे। उनकी वीरता, संघर्ष और बलिदान की गाथाएं आज भी जनमानस में जीवंत हैं। यही कारण है कि उनकी गौरव गाथा को संरक्षित और चिरस्थायी बनाए रखने के लिए जयंती समारोह को इस वर्ष और अधिक भव्य एवं ऐतिहासिक स्वरूप देने की तैयारी की जा रही है। बैठक के दौरान संरक्षक बुधेन्द्र बहादुर सिंह ने कहा कि राना बेनी माधव सिंह का जीवन राष्ट्र और स्वाभिमान की रक्षा के लिए समर्पित था तथा उनकी गाथा हर भारतीय के लिए प्रेरणा है। वरिष्ठ सदस्य दिलीप द्विवेदी ने कहा कि राना बेनी माधव सिंह की स्मृतियों को संरक्षित रखना हम सभी का नैतिक दायित्व है। वहीं वरिष्ठ सदस्य अरुण त्रिपाठी ने कहा कि युवाओं को अपने महानायकों के संघर्ष और बलिदान से परिचित कराना समय की आवश्यकता है। समिति अध्यक्ष राजकुमार सिंह धीरज ने कहा कि नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ना ही जयंती समारोह का सबसे बड़ा उद्देश्य है। वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामअकबाल बहादुर सिंह ने कहा कि राना की वीरता और बलिदान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए समिति निरंतर कार्य कर रही है। पूर्व डिप्टी एसपी उपाध्यक्ष आशापाल सिंह ने कहा जयंती समारोह राष्ट्रभक्ति और सामाजिक चेतना का महाअभियान बनेगा। संयोजक अरुणेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि जयंती समारोह को ऐतिहासिक स्वरूप देने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। सहायक प्रोफेसर प्रवेश नारायण सिंह ‘मोनू’ ने कहा कि राना की शौर्यगाथाएं भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर हैं, जिन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। बैठक में राना समिति शंकरपुर के संस्थापक हरिचंद्र बहादुर सिंह, संरक्षक बुधेन्द्र बहादुर सिंह, अध्यक्ष धीरज सिंह, संयोजक अरुणेंद्र सिंह चौहान, वरिष्ठ सदस्य अरुण त्रिपाठी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामअकबाल बहादुर सिंह, उपाध्यक्ष आशापाल सिंह, भगवत प्रताप सिंह, सहायक प्रोफेसर प्रवेश नारायण सिंह, इंजीनियर राजकुमार सिंह, वरिष्ठ सदस्य दिलीप द्विवेदी,
समर बहादुर सिंह, दिनेश सिंह, पूर्णेंदु सिंह चौहान राजू, छोटे सिंह, शिवकमल सिंह चौहान, अजय सिंह बजाज, दीपू सिंह, गोरख सिंह सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इसके अलावा शंकरपुर इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य लेफ्टिनेंट सत्येंद्र कुमार, शिक्षक अमरनाथ सिंह, विभूति नारायण पांडेय, शिक्षक अनिल सिंह, सहायक लिपिक धीरज सिंह समेत अन्य सदस्य भी मौजूद रहे।
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