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ललित को उसके पिता द्वारा दिए संस्कारों से मन में जागृत हुई पिता की मूर्ति स्थापना की इच्छा 


पिता को ईश्वर का दर्जा देकर घर में स्थापित की प्रतिमा 

ललित को उसके पिता द्वारा दिए संस्कारों से मन में जागृत हुई पिता की मूर्ति स्थापना की इच्छा 

पिता की सुबह-शाम करते हैं सेवा और पूजा 

 

रायबरेली। भारत की माटी में वह संस्कार वह अपनापन है कि बेटे माता-पिता का दिया हुआ संस्कार संजोए हुए है वह आज भी जीवित है जिस पुत्र को अपने माता-पिता के अंदर ईश्वर दर्शन का दर्जा और प्रेरणा देते है पिता की प्रतिमा स्थापित करने का मनोभाव उत्पन्न करती है और करा भी। एहसास होता है ललित को कि उनके पिता हमेशा उनके साथ हैं।

जी हां हम बात कर रहे हैं रायबरेली जनपद के लालगंज तहसील के खीरो ब्लॉक में स्थित डुमटहर मजरे अतरहर में जन्मे ललित शुक्ला की जिनकी उम्र इस समय तकरीबन 50-55 वर्ष की है।

ललित शुक्ला के पिता का देहांत 3 मई 2021 को हुआ था। उसके बाद ललित के मन में ही एक प्रेरणा जागी। ललित ने अपने पिता की प्रतिमा बनारस में मशहूर कारीगरों द्वारा बनवाई जिसमें तकरीबन एक लाख पचास रुपए का खर्चा आया।

 

बनारस के बहुत ही ज्ञानी और योग्य ब्राह्मणों द्वारा 27 जनवरी 2022 को विधि विधान से पूजा पाठ करके प्रतिमा घर में स्थापित किया गया। स्थापना के अवसर पर बड़ा विशाल भंडारा भी करवाया। ललित शुक्ला के पिता स्व. बद्री नारायण शुक्ला नियमों संयम पूजा पाठ कराने में क्षेत्र के अग्रणी ब्राह्मण थे। धर्म में तगड़ी आस्था थी ललित शुक्ला का कहना है कि उनके पिता का चरित्र अति तेजस्वी और ऊर्जावान था। वह बहुत ही धार्मिक व्यक्ति थे।

भगवान का भजन कीर्तन हमेशा किया करते थे समाज में उन्हें गुरु जी के नाम से जाना जाता था। ललित ने घर के अंदर ही अपने पिता बद्री नारायण शुक्ला और उसी से जुड़ा मां लक्ष्मी और भगवान नारायण जी का मंदिर भी बनवाया है।

ललित और उनकी माताजी सरला शुक्ला नित्य कर्म पूजा पाठ किया करते हैं ललित की मां सरला लगभग 80 वर्ष उम्र की है।

ललित शुक्ला का कहना है कि अब आगे का जीवन पिताजी की प्रतिमा की सेवा और माता जी की सेवा में गुजारना हैं इससे उन्हें आत्मिक आनंद की प्राप्त होती है । ललित की एक बेटी भी है जिसकी शादी वह कर चुके हैं ललित शुक्ला तीन भाई और दो बहन है जो अपने गृहस्थ जीवन में रहते हैं। कहना है भाई बहनों बेटियों और परिवार में बहुत ही प्रेम है और एक दूसरे के प्रति सम्मान है यही हमारे पिताजी द्वारा दिया गया संस्कार है सभी में।

 

स्व. बद्री नारायण शुक्ला की प्रतिमा को व्यवस्थित रूप से सजाया गया है पूजा पाठ श्रृंगार का विशेष ख्याल रखा जाता। प्रतिमा को एक बड़े कंबल से लपेट के रखा गया है सिर पर ऊनी टोपी लगाई गई है ललित का कहना है कि जैसे आम इंसान को सर्दी गर्मी बरसात में मौसम अनुसार कपड़े बदलने चाहिए उसी अनुसार वह अपने पिताजी के कपड़े बदलते हैं सुबह स्नान कराने के बाद तेल पाउडर इत्र क्रीम नित्य लगते हैं और उनका मानना है कि उनके पिताजी का आशीर्वाद उनके साथ हमेशा बना रहता है। ललित का कहना है कि उनकी पत्नी राधा शुक्ला भी उनकी इस सेवा में निरंतर साथ देती हैं और परिवार में इसी से हंसी खुशी का माहौल हमेशा बना रहता है।

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