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Home / न्यूज़ / 1857 के स्वतंत्रता आंदोलन की महान वीरांगना झलकारी बाई की 195 वीं जयंती सकरा ग्राम सभा में मनाई गई। जयंती में उनके जन्मदिन 22 नवंबर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किए जाने की मांग की गई।

1857 के स्वतंत्रता आंदोलन की महान वीरांगना झलकारी बाई की 195 वीं जयंती सकरा ग्राम सभा में मनाई गई। जयंती में उनके जन्मदिन 22 नवंबर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किए जाने की मांग की गई।


 

1857 के स्वतंत्रता आंदोलन की महान वीरांगना झलकारी बाई की 195 वीं जयंती सकरा ग्राम सभा में मनाई गई। जयंती में उनके जन्मदिन 22 नवंबर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किए जाने की मांग की गई।

         रायबरेली । राही विकास खंड स्थित सकरा ग्राम सभा में वीरांगना झलकारी बाई की 195 वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई। राष्ट्रीय कोरी समाज जागृति महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बेंचे लाल कोरी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि 22 नवम्बर को वीरांगना झलकारी बाई की जयंती पूरे देश में सौहार्दपूर्ण ढंग से मनाई जाती है। अतः उनके जन्मदिन पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाय। उनके नाम पर राजकीय डिग्री कॉलेज, इंटर कॉलेज और विश्वविद्यालय खोले जांय। जिलों के नाम, सरकारी संस्थानों के नाम, पुलों के नाम वीरांगना झलकारी बाई के नाम पर रखे जाएं।

विशिष्ट अतिथि के रूप में राष्ट्रीय अम्बेडकर सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट उदय प्रताप कोरी ने कहा कि वीरांगना झलकारी बाई महिलाओं के लिए आदर्श सन्नारी हैं, हमें उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। इंडियन एक्सक्लूसिव पार्टी के राष्ट्रीय सचिव राम लखन कोरी ने कहा कि वीरांगना झलकारी बाई 1857 के स्वतंत्रता आंदोलन में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर अंग्रेजों से मुकाबला करते हुए 5 अप्रैल 1858 को वीरगति को प्राप्त हुई थीं ।उनका अदम्य साहस अनुकरणीय है। लेखक एवं सामाजिक चिंतक के.पी. राहुल ने कहा कि उनके जीवन दर्शन को स्कूल के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाए।

राष्ट्रीय कोरी समाज जागृति महासभा के प्रदेश महामंत्री दुर्गा प्रसाद अनुरागी, सम्राट अशोक क्लब शाखा रायबरेली के संरक्षक एडवोकेट शाक्य एस.एन. मौर्य, विश्व दलित परिषद के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुरील, कबीर सद्भावना वीबर्स ट्रस्ट के संरक्षक राम नाथ भारती आदि ने वीरांगना झलकारी बाई के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। इन लोगों ने कहा कि वीरांगना झलकारी बाई का जन्म 22 नवंबर 1830 को झांसी से चार कोस दूर भोजला गांव में हुआ था। इनका विवाह 10 वर्ष की अवस्था में पूरन कोरी से हुआ था। ये झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की सेना में दुर्गा दल की सेना नायक थीं। इन्होने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे तथा शपथ लिया था कि जब तक झांसी अंग्रेजों से आजाद नहीं हो जाएगी मैं अपने मांग में सिंदूर नहीं लगाऊंगीं।

जयंती समारोह का संचालन डॉ सुनील दत्त ने किया। वीरांगना झलकारी बाई कल्याण एवं विकास परिषद रायबरेली के अध्यक्ष राम सजीवन धीमान ने जयंती समारोह की अध्यक्षता की। शिक्षक राकेश कुमार ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के प्रमुख संयोजक राम अहोरे कोरी ने अतिथियों को माल्यार्पण और शाल्यार्पण से स्वागत किया। कार्यक्रम की शुरुआत बुद्ध वंदना, तिसरण और पंचसील से हुई।

इस अवसर पर राजेश कुमार मौर्य, अयोध्या प्रसाद कोरी, गंगा प्रसाद, राम नरेश मौर्य, राम केवल कोरी (आर. के.), राकेश कुमार, श्यामू पूर्व प्रधान, सन्त लाल मौर्य, मुन्ना लाल कोरी, सोनू पासी पूर्व प्रधान, मुन्ना भाई, गोवर्धन लाल, संगीता वर्मा, प्रमोद कुमार बौद्ध, नरेन्द्र कुमार, पत्रकार राजेश राज, इंजीनियर दिनेश रतन बौद्ध, मोहनलाल, राम समुझ लाल आदि लोग मौजूद रहे।

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