राना बेनी माधव सिंह की 221वीं जयंती पर जगतपुर में उमड़ा जनसैलाब
राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने फहराया 108 फीट तिरंगा, किया राना प्रतिमा पर पुष्पवर्षा
ओलंपियन सुधा सिंह सहित बैसवारे की 100 विभूतियां सम्मानित, देशभक्ति से सराबोर हुआ समारोह
कवि राम भदावर और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां, पांच हजार से अधिक लोगों की रही उपस्थित
जगतपुर (रायबरेली)।
“खूब लड़ा मरदाना, वह तो शंकरपुर का राना था…” की गूंज रविवार को बैसवारे की धरती पर उस समय सजीव हो उठी जब जगतपुर कस्बे में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 के अमर सेनानी राना बेनी माधव सिंह की 221वीं जयंती पर अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा। आज़ादी के बाद इस धरती पर आयोजित अब तक का सबसे बड़ा समारोह देशभक्ति की भावना से सराबोर रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता उच्च न्यायालय लखनऊ के पूर्व न्यायमूर्ति डीपी सिंह ने की, जबकि मुख्य अतिथि प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह रहे।
सुबह 11 बजे राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने राना की कुलदेवी मां भवानी दुर्गा मंदिर में दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया और तत्पश्चात राना पार्क स्थित अश्वारोही प्रतिमा पर पुष्पवर्षा कर नमन किया। इसके उपरांत जिला पंचायत भवन परिसर में 108 फीट ऊंचा तिरंगा फहराकर उन्होंने समारोह की औपचारिक शुरुआत की। राज्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि राना बेनी माधव सिंह 1857 की क्रांति के महानायक ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की अमर धरोहर हैं। उनके बलिदान के बिना स्वतंत्रता संग्राम अधूरा है। राना ने अंग्रेजी हुकूमत की जड़ों को हिलाकर आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता का स्वप्न दिखाया। उनका संपूर्ण जीवन त्याग, राष्ट्रभक्ति और शौर्य की अद्वितीय मिसाल है। उन्होंने आह्वान किया कि राना के आदर्शों और बलिदान की ज्योति को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हर नागरिक का कर्तव्य है। इस अवसर पर बैसवारे की विभूतियों को सम्मानित कर उनकी उपलब्धियों का गौरव बढ़ाया गया। खेल जगत की धरोहर, ओलंपियन एवं पद्मश्री अर्जुन अवॉर्डी सुधा सिंह को ‘राना स्मृति सम्मान’ प्रदान किया गया। पूर्व कुलपति शिवबरन शुक्ला, प्रो. संजय सिंह, ठाकुर बृजेश सिंह समेत बैसवारे की सौ से अधिक विभूतियों को अंगवस्त्र एवं माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर लोग गदगद और गर्वित नजर आए।
भव्य पंडाल में प्रख्यात कवि राम भदावर और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह को नई ऊंचाई दी। प्रख्यात कवि राम भदावर सिंह ने राना और उनके सेनापति बीरा पासी की वीरता का मार्मिक चित्रण कर श्रोताओं में जोश भर दिया। गायिका श्रृष्टि परिहार और आल्हा गायिका काजल सिंह की प्रस्तुतियों ने देशभक्ति का ज्वार बहा दिया। पूरे समारोह में भारत माता के जयकारे गूंजते रहे।
करीब पांच हजार लोगों की उपस्थिति वाले इस आयोजन में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। डलमऊ सीओ अरुण कुमार नौहर की अगुवाई में कई थानों का पुलिस बल तैनात रहा। समारोह में भाजपा जिलाध्यक्ष बुद्धीलाल पासी, पूर्व विधायक इंद्रेश विक्रम सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता ओपी यादव सहित जनप्रतिनिधि व गणमान्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे। राना की जन्मस्थली शंकरपुर का ऐतिहासिक महत्व भी चर्चा में रहा। यहां का किला अंग्रेजों की तोपों से ध्वस्त हो गया था, किंतु मां दुर्गा का मंदिर आज भी अक्षुण्ण है। 1964 में स्थापित राना स्मारक विद्यालय आज इंटर कॉलेज का रूप ले चुका है। वर्ष 2002 में यहां अश्वारोही प्रतिमा स्थापित हुई थी, जिसका लोकार्पण बीती 20 फरवरी को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने किया था। जयंती समारोह ने न केवल राना बेनी माधव सिंह के बलिदान की स्मृतियों को ताजा किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि बैसवारे की यह पावन धरती आज भी देशभक्ति की ज्योति से आलोकित है।
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