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गुरु की निष्ठा से विनम्रता आती है चंदन वाला कंठी से नहीं “स्वामी स्वात्मानंद जी महाराज”


गुरु की निष्ठा से विनम्रता आती है चंदन वाला कंठी से नहीं “स्वामी स्वात्मानंद जी महाराज”
भागवत कथा सुनने को उमड़ता है जन सैलाब
गजियापुर सरेनी रायबरेली में चल रही साप्ताहिक
भागवत ज्ञान सप्ताह के तृतीय दिवस की कथा कहते हुए दिगम्बर आश्रम असनी के परमहंस संत , भागवत हृदय पुराण के रचनाकार–स्वामी स्वात्मानंद जी ने कहा कि परमात्मा की भक्ति से बढ़कर कुछ भी नहीं है ।चंदन ,माला ,कंठी से भक्ति नहीं हो सकती, यह सब तो भक्ति के रक्षक हैं ।गुरु निष्ठा से विनम्रता आती है। विनम्रता से श्रद्धा और श्रद्धा से ज्ञान प्राप्त होता है। ज्ञान और भक्ति एक दूसरे के पूरक हैं। गुरु तथा परमात्मा ,भक्त की रक्षा करते हैं ,जिससे उसका लोक और परलोक दोनों ही संवर जाते हैं ।जिस प्रकार से कृषक बादलों के वर्षण की प्रतीक्षा करते हैं ,उसी प्रकार गुरु की करुणा और कृपावृष्टि की प्रतीक्षा शिष्य को करनी चाहिए। विश्व में विकास के नाम पर होने वाले विनाश पर चिंता व्यक्त करते हुए स्वामी जी ने कहा कि आजकल के बच्चे गिद्ध प्रजाति को न देख पाते हैं न , पहचान पाते हैं,और न ही उनके महत्व को ही जानते हैं। जंगल उजड़ रहे हैं ;गौरैया तथा बया के घोसले लुप्त होते जा रहे हैं–हमें पारितंत्रीय असंतुलन को बचाना होगा। प्राचीन कल में गुरु अपने शिष्यों को आदेशित करते थे ,कि पहले वन में जाकर 12 आम के पौधे लगाइए और उनकी सेवा 12 वर्ष तक करिए ,तभी तुम शिष्य होने की पात्रता पाओगे। भगवान कृष्ण का वर्णन करते हुए कहा कि जो चोर है, वही चित्त चोर है ,माखन चोर है, चीर चोर भी है वही,और वही पाञ्चाली का चीर बढ़ाने वाला भी है ;भक्तों को अभय दान देने वाला भी है ;यहां तक की पापियों का भी उद्धार करने वाला भी वही , योगेश्वर वासुदेव ही हैं।कथा को आगे बढ़ाते हुए स्वामी जी ने कहा कि धर्मात्मा पृथु ने अधर्मी वेणु को उसी तरह पवित्र किया,जिस तरह महात्मा प्रह्लाद ने अपने पिता हिरण्यकश्यप को। संत श्री ने व्यास पीठ से गजेन्द्रमोक्ष,प्रचेत,अर्चि ,जड़ भरत, अजामिल ,दधीचि, वृत्तासुर निग्रह आदि उपाख्यानो का मार्मिक वर्णन किया और भागवत सुनने वाले लोगों को उपदेशित किया, “सभी भक्त जनों !सगुण अथवा निर्गुण ब्रह्म की उपासना करो; जिस ब्रह्म से जगत की उत्पत्ति, स्थिति और जीवन होता है।जिसके बंनाने और धारण करने से यह जगत विद्यमान हुआ है, अथवा ब्रह्म से सहचरित हुआ है।” इसी में आपका सर्व विधि कल्याण होगा।कथा पाण्डाल में, दो हजार भागवत श्लोकों का ,9दिन तक, पाठ अनुष्ठान करने वाले महामहोपाध्याय प्रो. अमलधारी सिंह , समाज सेवी सुधा द्विवेदी, योप संस्थापक उमेश चन्द्र श्रीवास्तव, राय बरेली के भक्त गण–मनोज पांडेय,हिंदुस्तान के ब्यूरो चीफ सुनील पाण्डेय,राजेश जी,गोपाल कृष्ण बाजपेयी, अम्बुज दीक्षित, राज कुमार दीक्षित,सुनील शुक्ल (प्राचार्य -डी. एल. एड.)लखनऊ, जबलपुर, पश्चिम बंगाल आदि सुदूर क्षेत्रो से पधारे हुए,स्वामी जी के भक्तो के साथ ही भारी संख्या में स्थानीय भक्तों,स्वामी जी के संत -शिष्यों ने भागवत कथा का रसास्वादन किया।

सुरेश बहादुर सिंह की रिपोर्ट

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