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ज्ञानज्योती मां सावित्रीबाई फुले जयंती, शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाये.!!


ज्ञानज्योती मां सावित्रीबाई फुले जयंती, शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाये.!!

क्रांतिज्योति मां सावित्री बाई फुले की जयंती के उपलक्ष्य पर उनके क्रांतिकारी विचारों को कोटि कोटि नमन

**माँ सावित्रीबाई फुले का कार्य समाज मे मौजूद सारी सामाजीक व्यवस्था से भी बढकर,उच्च कोटि का कार्य है। उनका महान एव अद्वितीय कार्य भारत रत्न से भी बढकर है।जहाँ खेलकूद,नाच,गाना, बजाना करने वाले लोगों को भारत रत्न से नवाजा जाता है कितनी शर्म की बात है।जिन्होंने समाज की बुनियादी कार्य किया उन महान कार्य को व्यवस्था जानबूझकर नजर अंदाज कर देतीे है। परंतु समाज मे जन्मे इन महापुरुषों का कार्य दुनिया के अस्तित्व तक अमर रहने वाला है। इन महापुरुषों के विचारों को दुनिया हर समय पूजती रहेगी, उनके कार्य के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करती रहेगी। वर्तमान मे जहाँ “भारत रत्न” मिले लोगो को जनता जानती तक नही जिन्हें जानती है उनके कार्यों को समाज मानती तक नही ,ऐसी परिस्थितियों मे कुछ नालायक लोग भारत रत्न से नवाजे गये जो उस सन्मान के लायक तक नही थे।समाज का बुनियादी कार्य यानि शिक्षा जो विपरीत परिस्थितियों मे समाज की महिला,पिछडो,वंचीतो को प्रदान की जिसका परिणाम आज बहुतायत समाज शिक्षीत बना। इस कार्य के प्रति इज्जत देना जरुरी था परंतु असमानता की बुनियाद पर खडी आज की समाज व्यवस्था मां सावित्रीबाई फुले के कार्य को नजर अंदाज कर समस्त वंचित समाज का तथा नारी जाति का अपमान करती है।ऐसी कृति से समाज मे पुरातन विचारों का प्रभाव आज भी दिखाई देता है क्यों की, जहाँ धर्मशास्त्र आदेश देता है के “ढोर गवार शुद्र पशु नारी ऐ सब ताडन के अधिकारी” मतलब आज भी नारी को समाज मे प्राथमिक दर्ज नही है। इन सारी कुरीतियों को उध्वस्त कर लडकियों की शिक्षा के लिये दिनरात परिश्रम कर भारत की प्रथम स्त्री शिक्षिका, स्त्रियो के हक्क के लिये लड़ने वाली समाजसुधारक क्रांतीज्योती मां सावित्रीबाई फुले का कार्य जो भारत रत्न से भी महान है। उनके कार्यों को समाज के पुरुषों के साथ साथ महिलाओं ने भी नजरअंदाज किया।यह उनके विचारों की स्मृति की अवहेलना है।जो कि बहुत ही खेद जनक है।
अवहेलना की सीमा कल और आज भी हो रही है। राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले के देहावसान के बाद उनकी चिता को अग्नि देने के लिए उनके दत्तक पुत्र यशवंत को धर्मशास्त्र और समाज की अनुमति नहीं देने पर स्वयं पुरानी नीच परंपरा को ठुकरा कर स्वयं मां सावित्री बाई ने चिता को अग्नि दी जिसका तत्कालीन समाज में उनकी बड़ी अवहेलना की और आज उनका वंशज बहुजन समाज भी अवहेलना कर रहा है। ऐसी सोये समाज को जगा कर भुलाये गए महापुरुषों को सम्मान प्रदान करने का संकल्प लेकर सामाजिक चेतना को उजागर करने का संकल्प लेते हैं।
किशोरीकांत चौधरी 
अध्यक्ष 
ऑल इंडिया एससी ,एसटी, ओबीसी ,एम्प्लाइज को ऑर्डिनेशन ,कौंसिल
वेकोलि – माजरी क्षेत्र

महाराष्ट्र ब्यूरो हेड किशोरीकान्त चौधरी की रिपोर्ट

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