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वेकोलि माजरी क्षेत्र में मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय के प्रांगण में बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि


वेकोलि माजरी क्षेत्र में मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय के प्रांगण में बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

बाबा साहेब का जीवन उस मोमबत्ती की तरह है जो खुद को जल कर औरो के जीवन के जीवन का अंधेरा मिटाती है

मेरे नाम की जय जयकार करने से अच्छा है मेरे बताये रास्ते पर चले

रात -रात भर मैं इस लिये जागता हूँ क्योंकि मेरा समाज सो रहा है।

संवाददाता माजरी
माजरी ( चंद्रपूर ) वेकोलि माजरी क्षेत्र में मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय के प्रांगण में महामानव ,भारत रत्न ,क्रांतिसूर्य बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर जी के 64वां महापरिनिर्वाण दिवस पर भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।मुख्य महाप्रबंधक माननीय विष्णु कुमार गुप्ता ने बाबा साहेब के प्रतिमा को माल्यार्पण करके कार्यक्रम की शुरुआत की ।तथा वहाँ पर उपस्थित अधिकारीयो एवं कर्मचारियों ने एवम महिलाओं ने बाबा साहेब की फ़ोटो को फूलों द्वारा भावभीनी अभिवादन किया ।
इस दौरान उपस्थित अनिल वरुटकर,रहांगडाले, गोपालकृष्णनन ,सुधाकर शम्भरकर ,सौ० संगीता वानखेड़े ने बाबा साहेब के जीवन पर प्रकाश डाला।और अपने अपने बिचार ब्यक्त किये।
वेकोलि माजरी क्षेत्र के मुख्य महाप्रबंधक वी के गुप्ता ने अपने अध्यक्षीय भाषण में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बाबा साहेब के तीन मूलमन्त्र हैं।
*शिक्षित बनो,संगठित रहो, संघर्ष करो।*
ऐ अमर नारा देने वाले और भारत को संविधान देने वाले महान नेता डॉक्टर भीमराव आंबेडकर जी जन्म 14अप्रेल1891को मध्यप्रदेश के एक छोटे से गांव में हुआ था। उनके पिताजी का नाम रामजी मालोजी सकपाल और मांता का भीमाबाई था ।उन्हें बाबा साहेब के नाम से भी जाना जाता हैं।अपने माँता पिता की चौदहवीं संतान के रूप जन्मे डॉक्टर भीमराव आंबेडकर जन्मजात प्रतिभा संपन्न थे।
8 अगस्त1930 को एक शोषित वर्ग के सम्मेलन के दौरान बाबा साहेब ने अपनी राजनीतिक दृष्टि को दुनिया के सामने रखा।जिसके अनुसार शोषित वर्ग की सुरक्षा उसकी सरकार और कांग्रेस दोनों से स्वतंत्र होने में हैं।अपने विवादस्पद विचारों और गांधी और कांग्रेस की कटु आलोचना के बावजूद अम्बेडकर जी की प्रतिष्ठा एक अद्वितीय विद्वान और विधिवेत्ता की थी ।जिसके कारण जब 15अगस्त1947को भारत स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाली नई सरकार अस्तित्व में आई तो उसने बाबा साहेब को देश के पहले कानून मंत्री के रूप में सेवा करने के लिए आमंत्रित किया।जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया ।
29अगस्त1947को अंबेडकर जी को स्वतंत्र भारत के नये संविधान की रचना के लिए बनी संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया।26नवम्बर1949को संविधान सभा ने संविधान को अपना लिया।14अक्टूबर1956को नागपुर में खुद और समर्थकों के साथ बौद्ध भिक्षु से पारंपरिक तरीके तीन रत्न ग्रहण और पंचशील अपनाते हुए बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया।और आज के ही दिन6दिसंबर1956को महापरिनिर्वाण हुआ।
उनके बहुआयामी प्रतिभा और विद्वत्ता की झलक उनके विचारों में साफ झलकती हैं।आइये उनके अनमोल विचारों को पढ़ें।
1, हम आदि से अंत तक भारतीय हैं।
2, सागर से मिल कर अपना पहचान खो देने वाली पानी की एक बूंद के विपरीत, इंसान जिस समाज में रहता है वहाँ अपनी पहचान नहीं खोता ओ सिर्फ समाज के विकास के लिए नहीं पैदा हुआ है बल्कि स्वंम के विकास के लिए भी पैदा हुआ है।
3, जीवन लंम्बा होने के बजाय महान होना चाहिए।

4, बाबा साहेब का जीवन उस मोमबत्ती की तरह है जो खुद को जल कर ओरों के जीवन का अंधेरा मिटाती हैं
जाती प्रधान देश में हमसब भारत के इस महान सपूत और राष्ट्र निर्माता को जाती और आरक्षण से आगे न जानने की कोशिश करते रहे।आधुनिक भारत के इस महान राष्ट्र निर्माता के महापरिनिर्वाण दिवस पर उनके चरणों मे मेरा शत-शत नमन।
इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में वेकोलि माजरी क्षेत्र के क्षेत्रीय कार्मिक प्रबन्धक मा०राजेश नायर ,मा०एल एस थोरात, मा०विजय कुमार बिडकर ,मा०मार्कण्डेय साहब , गोपाल कृष्णनन यूनियन प्रतिनिधि आर एल गेडाम, अनिल कुमार ,मोहम्मद खान, अनिल वरुटकर बंडू उपरे, दीपक ढोके ,एस एस दातारकर ,रहांगडाले, किशोरीकांत चौधरी, एस एस शम्भरकर, जी जे रायपूरे ,डी एस रामटेके, प्रदीप खंडाले,राजेश, गुरले , वामन मण्डपे, श्यामजीत राम ,शिवकांत रामजी सोमदत्तकेवट ,सौ०संगीता वानखेड़े,कल्पना कुचनकर ,नीलिमा लोनकर, भारती काकड़े ,मनीषा पारखी, वर्षा उपरे, स्नेहल बोधे ,आशा पोले इत्यादि लोग उपस्थित थे
कार्यक्रम के अंत मे मा० एल एस थोरात ने इस कार्यक्रम में उपस्थित होने के लिए सभी अधिकारियो, कर्मचारियों एवम महिलाओं का आभार प्रकट किया।

@ किशोरीकान्त चौधरी (ब्यूरो चीफ)महाराष्ट्र

संवाददाता मुरली प्रसाद रघुनंदन की रिपोर्ट

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