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आखिर क्यों किसान नये कृषि कानून के खिलाफ कड़कड़ाती ठंड में सड़कों पर बैठा


आखिर क्यों किसान नये कृषि कानून के खिलाफ कड़कड़ाती ठंड में सड़कों पर बैठा

डेस्क न्यूज़

दिल्ली के बॉर्डर पर नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसानों के प्रदर्शन

किसान संगठनों की माने तो भारत के अलग-अलग राज्यों से और किसान इस आंदोलन से जुड़ने वाले हैं. यानी आंदोलन धीरे-धीरे और बढ़ेगा.

इन छह दिनों में केंद्र सरकार की तरफ़ से बड़े मंत्रियों ने तीन बार बातचीत की पेशकश भी की.

पहले नरेंद्र सिंह तोमर फिर गृह मंत्री अमित शाह और बीती रात केंद्रीय गृह सचिव ने किसान संगठनों को बातचीत के लिए निमंत्रण भेजा.

किसान संगठन मंगलवार को केंद्र सरकार से बातचीत के लिए तैयार भी हैं.

किसानों के साथ चंद्रशेखर आजाद

कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद भी पहुंच गए हैं. उन्होंने कहा कि हम लोग किसानों के साथ हैं और अगर सरकार इनके साथ तानाशाही करेगी तो हम सड़कों पर उतरेंगे.

पंजाब के पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल ने पद्म विभूषण सम्मान को केंद्र सरकार को वापस करने की घोषणा की है। ऐसा उन्होंने किसानों के समर्थन में किया है।
भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर ने सिंघू बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों से मुलाकात की। इस मौके पर उन्होंने कहा, “अगर सरकार तानाशाह हो जाती है तो लोगों को सड़कों पर उतरना चाहिए। सरकार को इस आंदोलन को रोकना चाहिए। हम अपने किसानों का समर्थन करने के लिए यहां हैं और अंत तक उनके साथ खड़े रहेंगे।”
किसानों के प्रदर्शन की वजह से दिल्ली और दिल्ली से सटे नोएडा, गाजियाबाद और हरियाणा की सीमाओं पर जाम लगा है। कई जगहों पर रूट डायवर्ट किया गया है।
दिल्ली के विज्ञान भवन में किसान नेता राकेश टिकैट ने कहा कि हमें उम्मीद है कि वार्ता सकारात्मक होगी। अगर हमारी मांग पूरी नहीं हुई तो किसान दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस की परेड में हिस्सा लेंगे।
किसान मजदूर संघर्ष समिति, पंजाब ने कहा कि जब तक पीएम मोदी सभी 507 किसान यूनियनों के नेताओं के साथ बैठक नहीं करेंगे तब तक वह सरकार द्वारा बुलाई गई किसी भी बैठक में शामिल नहीं होंगे।

 

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की।

 

बताया गया है कि दोनों नेताओं के बीच किसानों के मुद्दे पर चर्चा हुई।
विज्ञान भवन में गुरुवार दोपहर 12 बजे होने वाली बैठक में कुल 35 किसान संगठनों के प्रतिनिधि हिस्सा ले सकते हैं। तोमर ने कहा, ‘हम किसानों के साथ बैठक करेंगे जिसमें किसी हद तक समाधान हो सकता है।’ उन्होंने कहा, ये कानून किसानों के हित में हैं। लेकिन कोई दिक्कत है तो हम उनकी चिंताओं पर चर्चा करने को तैयार हैं।
किसानों के साथ मंगलवार को हुई वार्ता में उठाए गए सवालों और गुरुवार को होने वाली चौथे दौर की बैठक की रणनीति पर विचार करने के लिए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल ने गृह मंत्री शाह से उनके आवास पर मुलाकात की। इस दौरान कृषि कानूनों को खत्म करने जैसी किसानों की जिद पर चर्चा हुई। गुरुवार की बैठक में किसानों को मनाने और कानून की बारीकियों से उन्हें परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा। माना जा रहा है कि किसानों के बड़े प्रतिनिधिमंडल की जगह सीमित संख्या में आने की बात को नकार देने जैसे मसले भी वार्ता की गंभीरता को प्रभावित करेंगे।


उधर, बार्डर पर डटे किसान संगठनों की कई बैठकें हुईं, जिसमें केंद्रीय मंत्रियों के साथ होने वाली वार्ता के एजेंडे पर कोई आम राय नहीं बन पाई। जबकि सरकार ने उन्हें बुधवार शाम तक अपनी आपत्तियों की सूची सौंप देने को कहा था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। किसानों की संयुक्त बैठक में भारतीय किसान यूनियन-टिकैत (भाकियू-टिकैत) के नेता राकेश टिकैत का संगठन भी शामिल हुआ। कृषि मंत्री की मंगलवार को भाकियू-टिकैत के नेताओं से अलग से मुलाकात हुई थी, जिसे लेकर माना जा रहा है कि आंदोलन कर रहे किसान संगठनों में मुद्दों को लेकर मतभेद है। लेकिन किसान संगठनों की बुधवार की बैठक में पंजाब के किसान संगठनों के साथ टिकैत ने भी हिस्सा लिया।
टिकैत ने बताया कि बैठक में सभी किसान संगठनों के नेताओं से कहा गया कि जारी किए जाने वाले बयानों में एकरूपता होनी चाहिए। मसले एक जैसे होने चाहिए। सरकार को सौंपी जाने वाली सूची के बारे में टिकैत ने बताया, ‘एमएसपी की गारंटी और संसद के पिछले सत्र में पारित तीनों कृषि कानूनों को खत्म करने की मांग पर वे अड़े रहेंगे।

रिपोर्ट-मनीष श्रीवास्तव 

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